Is Honey + Hot Water = Toxins?? – Know Ayurveda facts

शहद + गरम पानी + नींबू : क्या वजन कम करने का सबसे प्रचलित प्रयोग हानिकारक है ? जाने वास्तविकता

मोटापा हमारे देश की एक सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। लोग इतने परेशान है की जो भी सरल उपाय लगे अपने शरीर पर परीक्षण करना शरू कर देते है। सोशियल मीडिया पर भी मोटापा कम करने वाले कथित नुस्खों की भरमार है। आज की व्यस्त जीवनशैली में अधिकाँश लोग “डूबते को तिनके का सहारा” की तरह बिना सोचे समझे उन नुस्खों को अपनाते जा रहे है। आज ऐसे ही एक नुस्ख़े के बार में बात करेगें जो दुर्भाग्यवश बहुत प्रचलित है पर लाभ की तुलना में हानि अधिक कर रहा है।

सोशियल मीडिया पर ये घरेलु नुस्खा बहुत वायरल है की १ ग्लास गरम पानी में नींबू का रस और शहद मीलाकर प्रातः काल पीने से वजन कम होता है।  ऐसा दावा किया जाता है की ये चमत्कारी प्रयोग अनेकों बीमारियों का एक मात्रा सटीक उपाय है। हमने भी इस प्रयोग को आयुर्वेद के अनेक ग्रंथो के अभ्यास से परखने का निश्चय किया। जो तथ्य सामने आये वो आश्चर्यजनक था।

हमने पाया यह प्रयोग आयुर्वेद में बताए दो अलग अलग प्रयोगों का मिश्र रूप है जिस से हानि हो रही है। नीचे बताये संदर्भ से इन्हें समझे :

 

१  अग्निं दीपयति , वातमनुलोमयति

—–चरक सू. 26/83

 

   श्लेश्मामवातमेदोघ्नं उष्णोदकं

—–भावप्रकाश पूर्व  1/23

 

प्रातः काल गरम पानी में नींबू का रस डालकर पीने से जठराग्नि प्रदीप्त होकर पाचन सुधरता है , भूख लगती है ,गैस की समस्या दूर होती है। इसके अलावा यह मेद धातु को भी कम करके वजन घटाता है।

 

२  शिशिरान्बु पिबेन्मधुप्रयुक्तं गणनाथो अपि भवेत्किलास्थिशेष: |

— वैद्यजीवनं ⅘

 

वैद्यजीवन नामक ग्रंथ में बताया गया है की प्रातः कल ठन्डे पानी में शहद मीलाकर पीने से गणेश जी जैसा भी हड्डी शेष रह जाता है।

 

दोनों प्रयोग अपनी अपनी जगह श्रेष्ठ व परिणाम देने वाले है पर जब उनका मिश्रण कर दिया जाता है तो लाभ की तुलना  हानि अधिक देखने मिलती है जैसे :

 

१) गरम पानी के साथ मधु विरुद्ध होने के कारण नुक़सानदेह है ऐसा अभी आयुर्वेद महर्षियों का मत है। यह एक प्रकार का विषैला मिश्रण बनाता है जो धीरे धीरे slow poison की तरह हानि पहुंचाता है।

उष्णै: विरुध्यते सर्वं विषान्वयता मधु|| –सुश्रुतसंहिता सुत्रस्थान ४५/१४४

 

२ ) अत्याधिक मात्रा में नींबू का प्रयोग करने से चमड़ी पर फोड़े, फुंसी , खुजली होना, मांस एवं अस्थि शिथिल करने से जोड़ों में दर्द , घुटनों का घीसना , एसिडिटी का बढ़ाना, बालों का झड़ना आदि दुष्प्रभाव देखे जाते है। साथ ही गठीया जैसे गंभीर जोड़ों के रोग हो सकते है ऐसा चरक महर्षि बताते है।

रक्तं दूषयति, मासं विदहति, कायं शिथिलीकरोति चरक सू. 26/43

 

अगर आप भी यह प्रयोग गलत तरीके से कर रहे है तो उसे रोकें।  इस प्रयोग करने का सही तरीका, किस प्रकार की प्रकृति या तासीर में कौन सा प्रयोग उपयुक्त है ये हम आगे बताएंगे।

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